HINDI KAVITA- निरंतर बना रहे

 

HINDI KAVITA- निरंतर बना रहे





आशा निराशा क्षणभरके है,
आपका आत्मविश्वास निरंतर रहे।

सुख दुःख क्षणभरके है,
आपके उत्तम विचार निरंतर बने रहे।

मिलना बिछड़ना क्षणभरका है,
आपके सम्बंध निरंतर बने रहे।

गिरना उठना क्षणभरका है,
आपका लक्ष्य निरंतर बना रहे।


HINDI MOTIVATIONAL KAVITA- तू शुरुआत तो कर

 

HINDI MOTIVATIONAL KAVITA




               


                जिंदगी के सफर में हम कई सारे छोटे बड़े सफर तय करते है,वो चाहे कुछ भी हो सकता है हमारा स्टडी कॅरिअर हो या फिर जॉब,हमारे नए रिश्ते,हमारे लक्ष्य.....

                कुछ लोग आसानीसे शरुआत कर शकते है तो कुछ लोग डरते है तो यह कविता इन्ही लोगो के  लिए है जो शरुआत करनेसे डरते है।



     तू शुरुआत तो कर


पथ्थर मूर्ति बनने को आतुर हे...(2)

तू बस शुरुआत तो कर।

तेरी मंजिल तेरा इंतज़ार कर रही है...(2)

तू बस शुरुआत तो कर।

शब्द जुड़कर कविता बनने को बेताब है...(2)

तू बस शुरुआत तो कर।

रंग चित्र को निखार ने को तैयार है....(2)

तू बस शुरुआत तो कर।

रास्ते अपने आप बन जायेगे...(2)

तू सफर की शरुआत तो कर।

हर वक्त कुछना कुछ बदलने को तैयार है...(2)

तू बस शरुआत तो कर।


hindi kavita- स्वदेश प्रेम

hindi kavita-  स्वदेश प्रेम

                                                                    


        स्वदेश प्रेम


                             विदेशी साजिशो के कारण आज भारतवर्ष में  जो हाल हुआ पड़ा है उसे मध्यनजर रखते हुए आज कविता लिखना जरूरी बन गया है। और सभी भारतीयों में स्वदेशप्रेम बढ़ाना भी जरूरी हो गया है। कोरोना महामारी के समय मे सबने सहन किया है उसके पीछे किसका हाथ है वो तो अब बच्चे बच्चे को पता चल गया है। गांधीजीने कई साल पहले स्वदेशी वस्तुओ के वपरास के लिए जो आंदोलन किया था उसी प्रकार के आंदोलन की आज जरूरत खड़ी हुई है। विश्वको यह दिखादेंने कि जरूरत खड़ी हुई है कि अगर कोई शांति से हमारे साथ खड़ा रहना चाहे तो हम गांधीवादी विचार भी रखते है और अगर हमारे सामने खड़े हुए तो सरदार पटेल की विचारधारा भी रखते है। अब तो स्वदेशी चीजे खरीद कर अपने भाइयो को मदद करना जरूरी बन गया है। अगर ए विचारधारा अच्छी लगे तो अपने आसपास  इसका प्रचार कीजिए। जय हिंद।




आज समय का पहिया घुमा है,

कोरोना महामारी को साथ लाया है,

अपने लोको से पहचान कराने आया है,

और गैरो पर से पर्दा उठाने आया ।


हमने बुरा वक्त देखा है,

सबके व्यवहार को  इस वक्त जांचा है,

अपने और गेरो का भेद पाया है,

कुछ गलतियां अब महसूस हुई है।


कोरोना ने हमारी आंखे खोली है,

अब हम भी बदल ने वाले है,

अब हम गेरो का साथ छोड़ने वाले है,

अब हम अपनो को गले लगाने वाले है।


वैसे तो हम वसुधैवकुटुम्बकम में मानने वाले है,

पर वक्त आने पर घर मे घुसके मारने वाले है,

अब हम विदेशियों का बहिष्कार करने वाले है,

अब हम स्वदेश प्रेम बढ़ाने वाले है।